Posted on: April 13, 2020 Posted by: Niharika Garg Comments: 0

 

    ‘होली’

उल्लास भरा है दिल में सबके
फागुनी घटा छायी है।
होली के रंगों में रंगकर,
धरती भी शरमायी है।।

रंग बिरंगे यौवन के संग,
प्रकृति भी इठलाती है।
खेतों में खिल उठी है सरसों,
गीत फगुनिया गाती है।।
पेड़-पौधे और पशु-पक्षी
सब में मस्ती छायी है।
होली के रंगों में रंगकर……….

बजा-बजाकर ढोल मंजीरे,
गीत खुशी के गाते सब।
घर-घर जाकर रंग लगाते,
सबको गले लगाते अब।।
आकर्षक छटा देख होली की,
गज़ब की शक्ति आयी है।
होली के रंगों में रंग कर….

प्रेम रंग की पिचकारी से,
सबको आज भिगो दो जी।
कटुता भरे व्यंग्य बाणों को,
प्रेम रंग में घोलों जी।।
शब्दों के ‘पुष्प’ नाप तोल में
जीवन की सच्चाई है।
होली के रंगों में………..

Leave a Comment